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त्रिपुरा में कैसे चुनावी समीकरण बदल सकता है

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हिंदी न्यूज़ विधानसभा चुनावत्रिपुरा में कैसे चुनावी समीकरण बदल सकता है ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ का मुद्दा? अमित शाह से मिले टिपरा मोथा के शाही प्रमुख

त्रिपुरा में कैसे चुनावी समीकरण बदल सकता है ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ का मुद्दा? अमित शाह से मिले टिपरा मोथा के शाही प्रमुख

त्रिपुरा जैसे राज्य में, जहां 60 में से 20 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं, वहां टिपरा मोथा इन चुनावों में एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है।

त्रिपुरा में कैसे चुनावी समीकरण बदल सकता है 'ग्रेटर टिपरालैंड' का मुद्दा? अमित शाह से मिले टिपरा मोथा के शाही प्रमुख

Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,अगरतलाWed, 25 Jan 2023 08:46 PM

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आगामी त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ का मुद्दा हावी है जो राज्य के चुनावी समीकरण बदल सकता है। शायद यही वजह है की राज्य और केंद्र की सत्ताधारी भाजपा सरकार इस मुद्दे का सावधानीपूर्वक हल निकलाने की कोशिश कर रही है। चुनाव से पहले गृह मंत्रालय ने ग्रेटर टिपरालैंड की मांग पर बातचीत के लिए क्षेत्रीय पार्टी टिपरा मोथा को आमंत्रित किया है। टिपरा मोथा पार्टी प्रमुख और शाही वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने बुधवार को सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की।

प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने एक दिन पहले ही स्पष्ट किया था कि वह अपनी ‘ग्रेटर टिप्रालैंड’ की मांग पर लिखित समझौते के बिना किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगा। उनकी इस घोषणा के बाद प्रद्योत के नेतृत्व में टिपरा मोथा प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत शुरू की है। बैठक के दौरान नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) के प्रमुख और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद थे। हालांकि बुधवार को दिल्ली की यात्रा कर रहे टिपरा मोथा के अधिकांश नेता बैठक और एजेंडे को लेकर चुप्पी साधे रहे।

“गृह मंत्री की मौजूदगी में सारी चर्चा होगी”

नई दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, टिपरा मोथा पार्टी के नेता अनिमेष देबबर्मा ने कहा: “मुझे लगता है कि केंद्रीय गृह मंत्री, महाराज (प्रद्योत किशोर) और असम के मुख्यमंत्री के बीच कल रात बातचीत हुई थी। चूंकि हम इतनी अच्छी संख्या में दिल्ली जा रहे हैं, इसलिए हमें उम्मीद है कि गृह मंत्री की मौजूदगी में सारी चर्चा होगी।” मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘राजनीति में लेन-देन का सिद्धांत होता है। इसलिए, निश्चित रूप से, यदि कोई संवैधानिक समाधान निकलता है, तो टिपरा मोथा से भी कुछ अपेक्षाएं होंगी। वे हमसे भी कुछ सलाह लेना चाहेंगे। देखते हैं वहां क्या होता है।”

सीट बंटवारे को लेकर बातचीत?

कयास लगाए जा रहे थे कि शायद टिपरा मोथा और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर कुछ बात हो सकती है। लेकिन दोपहर में, खुद शाही वंशज प्रद्योत किशोर ने ट्विटर पर कहा कि अफवाहों के विपरीत सीट बंटवारे को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “हमें गृह मंत्रालय से सूचना मिली है कि वे ग्रेटर टिप्रालैंड को लेकर हमारी मांग पर संवैधानिक समाधान को लेकर हमसे बात करना चाहते हैं। हमने बार-बार कहा है कि जब तक हमें अपनी मांग के संवैधानिक समाधान पर भारत सरकार से लिखित आश्वासन नहीं मिलता है, तब तक हम सीटों के बंटवारे को तो छोड़ ही दीजिए.. हम किसी से भी गठबंधन नहीं करेंगे।”

बीजेपी और टिपरा मोथा के बीच सीटों के बंटवारे की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए, त्रिपुरा बीजेपी के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने कहा, “हमें राज्य स्तर पर ऐसी किसी भी चर्चा की जानकारी नहीं है। हालांकि, अगर कोई हमारे सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत से सहमत होकर हमारे साथ आना चाहता है, तो हमें कोई समस्या नहीं है।”

त्रिपुरा में क्यों अहम है टिपरा मोथा

त्रिपुरा जैसे राज्य में, जहां 60 में से 20 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं, वहां टिपरा मोथा इन चुनावों में एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकती है। मोथा भाजपा की सहयोगी आईपीएफटी के साथ विलय की बातचीत भी शुरू कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्रिपुरा में सरकार बनाने की इच्छा रखने वाली किसी भी पार्टी को टिपरा मोथा को साथ लेकर चलना ही फायदेमंद होगा।

राजनीति के खेल में टिपरा मोथा को लुभाने में जुटी राष्ट्रीय पार्टियां

टिपरा मोथा त्रिपुरा की राजनीतिक में तुरुप का इक्का समझी जा रही है। इसको लुभाने के लिए राष्ट्रीय पार्टियां एक-दूसरे के साथ होड़ कर रही हैं क्योंकि माना जा रहा है कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद इस राज्य में कौन शासन करेगा, यह निर्धारित करने में आदिवासी पार्टी के वोट महत्वपूर्ण होंगे। प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाली पार्टी टिपरा मोथा का त्रिपुरा जनजातीय स्वायत्त जिला परिषद में शासन है और यह ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग कर रही है। टिपरा मोथा का कहना है कि वह किसी भी उस पार्टी या गठबंधन का समर्थन करेगी जो उसकी मांगों से सहमत होगा।

बड़ी पार्टियों को कड़ी टक्कर दे रही है टिपरा मोथा 

पार्टी ने पिछले साल अप्रैल में हुए त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनावों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-आईपीएफटी गठबंधन के साथ सीधे मुकाबले में ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग पर 28 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी। विश्लेषकों का कहना है कि यह मांग 20 विधानसभा सीटों के परिणामों को प्रभावित करेगी, जहां 60 सदस्यीय सदन में आदिवासी चुनावी रूप से काफी प्रभावशाली हैं।

संवैधानिक समाधान चाहते: देबबर्मा 

देबबर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन करने को तैयार है जो त्रिपुरा के ‘मूल’ लोगों की मांग का संवैधानिक समाधान प्रदान करे। यहां की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने अपनी ओर से इस सुदूर राज्य के विकास के लिए सभी पड़ावों को पार कर लिया है और परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। देबबर्मा ने कई मौकों पर संवाददाताओं से कहा है, ‘‘हम अपनी मांग का एक संवैधानिक समाधान चाहते हैं, जो केवल केंद्र सरकार प्रदान कर सकती है। केवल किसी वित्तीय पैकेज को मंजूरी देकर हमारी समस्या का समाधान संभव नहीं है।’’

पार्टी चाहती है कि केंद्र उसकी मांग पर चर्चा करे, लेकिन अभी तक उसे कोई जवाब नहीं मिला है। सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस सहित राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने हालांकि कई मौकों पर इस मांग को खारिज कर दिया है और इसे ‘‘अलगाववादी और विभाजनकारी’’ बताया है। देबबर्मा ने कहा, ‘‘कई बंगाली, आदिवासी परिषद क्षेत्र में रहते हैं। हम चाहते हैं कि वे शांति और सद्भाव से रहें। त्रिपुरा की रियासत में, बंगाली और आदिवासी शांति से रहते थे और हम उस परंपरा को बनाए रखना चाहते हैं।’’

टिपरा मोथा की ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग के खिलाफ है तृणमूल कांग्रेस

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता राजीव बनर्जी ने मंगलवार को यहां कहा कि पार्टी ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ या त्रिपुरा के विभाजन की टिपरा मोथा की मांग का समर्थन नहीं करती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस पहले ही टिपरा मोथा सुप्रीमो प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा की ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ या जातीय लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग को ठुकरा चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस के त्रिपुरा प्रभारी राजीव बनर्जी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘तृणमूल कांग्रेस ग्रेटर टिपरालैंड की मांग या छोटे राज्य के विभाजन के खिलाफ है, लेकिन जातीय लोगों को विशेष दर्जा देने पर बातचीत की जा सकती है।’’

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